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मंडी में गैर कृषि व्यापार करने वाले व्यापारियों को थमाए नोटिस
उज्जैन-आगर रोड स्थित कृषि उपज मंडी में ऐसे व्यापारी अब मंडी समिति के निशाने पर आ गए है, जो बीते लंबे समय से गैर कृषि उपज व्यापार कर रहे है। मंडी समिति ने ऐसे व्यापारियों को कृषि व्यापार करने के लिए ही लायसेंस देकर भूखंड लीज पर आवंटित किए थे, लेकिन कई व्यापारियों ने कृषि उपज व्यापार न करते हुए अन्य धंधा करना शुरु कर दिया है।
समिति प्रशासन ने ऐसी दुकानों को अतिक्रमण मानते हुए २० जनवरी के पहले स्वयं व्यापारियों को अतिक्रमण हटाने का आदेश देते हुए कब्जा समिति को देने के लिए कहा है। यदि इसके बाद भी ऐसा नहीं होता है तो समिति स्वयं कब्जा लेने की कार्रवाई करेगी। मंडी प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार ऐसे कई व्यापारी है, जिन्हें ९० वर्षों के लिए लीज पर कृषि उपज व्यापार करने के लिए भूखंड आवंटित किए गए थे,
परंतु बीते कई वर्षों ऐसे व्यापारियों ने कृषि उपज व्यापार की बजाय अन्य व्यवसाय करने की शुरूआत कर दी। बताया गया है कि सर्वे के बाद सूचीबद्ध किए गए ऐसे व्यापारियों की लीज वर्ष २००५ में ही निरस्त कर दी गई है। प्रशासन ने ऐसे सूचीबद्ध सभी व्यापारियों को सूचना पत्र भेजकर संबंधितों की दुकानों पर नोटिस को चस्पा कर दिए है।
जानकारी के अनुसार नोटिस में यह कहा गया है कि उक्त भूखंड का वास्तविक अधिपत्य २० जनवरी के पूर्व मंडी समिति को सुपुर्द कर दें, अन्यथा इसके बाद कब्जा लेने की कार्रवाई होगी और नुकसान के लिए स्वयं व्यापारी जिम्मेदार माना जाएगा।
अनुमति मांगी है
व्यापारी संघ अध्यक्ष– मंडी व्यापारी संघ अध्यक्ष मुकेश हरभजनका ने बताया कि वैसे तो नियमानुसार व्यापारियों को अनाज का ही व्यापार करना चाहिए, परंतु अन्य किसान संबंधी व्यापार भी किए जाने में आपत्ति नहीं होना चाहिए।
कृषि क्षेत्र का विस्तार हो रहा है और इससे संबंधित अन्य सभी व्यापार करना व्यापारियों के लिए जरूरी हो रहा है। संघ ने प्रदेश सरकार से इसके लिए अनुमति देने के लिए पत्र लिखा है। यह समस्या उज्जैन की ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की है।